शायरियां

शायरियां: मयख़ाने में गिलास या गिलास में मयख़ाना

Poetry & Shayari

शायरियां: मयख़ाने में गिलास या गिलास में मयख़ाना
शायर – श्वेत

मयख़ाने में गिलास या गिलास में मयख़ाना
ख्वाइशों और दर्द का ये गिलास ही है ठिकाना


बस चार गिलास रख दो
मेरे दोस्त पास रख दो करता है
हँसते हुए सब जायेंगे
चाहे दुनिया उदास रख दो


बोतलों में बंद है
दिनभर की थकान
दो गिलास रख दो
कि दर्द उढ़ेला जाये

शायरियां

हमने आज ही पीकर जाना
कि होश में रहना किसको कहते हैं


न कहो इस जाम को पीने को
दर्द सारे होंठो से बयां हो जायेंगे
औरों का तो इल्म नहीं
हम खुद से ख़फ़ा हो जायेंगे
गर लगी आदत इस महफ़िल की साक़ी
ग़म मेरे सारे फिर से रवां हो जायेंगे

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1 thought on “शायरियां: मयख़ाने में गिलास या गिलास में मयख़ाना

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