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Hindi Poetry – मैं तो बस एक आम नागरिक हूँ

Poetry & Shayari

Hindi Poetry – मैं तो बस एक आम नागरिक हूँ..

कवि – श्वेत

सोच रहा हूँ, कौन सी मौत मरूँ!
वायरस की, या भूख की?
आसान तो कोई नहीं,
तकलीफ तो दोनों में ही होगी…

Hinsi Poetry- Shwet- मैं तो बस एक आम नागरिक हूँ

पर एक सिर्फ मुझे मारेगी,
और दूसरी ना जाने कितनों को…

अब ये निर्णय मुझे ही लेना है कि,
मैं स्व केन्द्रित हो स्वयं के हित में सोचूँ,
या लाखों करोड़ों के बारे में सोचते हुए,
देशहित में…

पर समस्या सिर्फ एक ही है,
मैं कोई सैनिक नहीं,
मैं तो बस एक आम नागरिक हूँ…

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