काव्य: आज फिर मैंने तुझको अपना प्यार बनाया है -- अक्स

काव्य: आज फिर मैंने तुझको अपना प्यार बनाया है — अक्स

Poetry & Shayari

आज फिर मेरे ज़हन में, एक ख्याल आया है
आज फिर मैंने तुझको, अपना प्यार बनाया है
उस मोड़ पर ज़िन्दगी के खड़ा हूँ मैं
जहाँ तेरी यादों को, अपना दिलदार बनाया है

होती है खुशबु की चाह, पतझड़ के आलम में
सूखे पत्तों को मैंने, अपना गुलज़ार बनाया है
आज फिर मैंने तुझको, अपना प्यार बनाया है

ग़म के फ़साने, अच्छे नहीं लगते होंठों पर
तेरे प्यार की सरगम को, लबों पर सजाया है
आज फिर मैंने तुझको, अपना प्यार बनाया है

इन आंसुओं से दोस्ती, मुझे इस कदर ग़म दे गई
इनके छलकते ही लगता है मेरा यार आया है
आज फिर मैंने तुझको अपना प्यार बनाया है

इस तरह हूँ अकेला तेरी जुदाई में, के
तन्हाई में मुझसे बात करता, मेरा साया है
आज फिर मैंने तुझको, अपना प्यार बनाया है

–अक्स

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