Love Poetry

काव्य : तेरी हर ख़्वाइश को, पलकों पर बैठाना चाहता हूँ – अक्स

Poetry & Shayari

प्यार की दहलीज़ पर, सपनों का दीप जलाना चाहता हूँ
ऐ जान तेरी हर ख़्वाइश को, पलकों पर बैठाना चाहता हूँ

तेरा ख़्याल दिल से नहीं जाता, तुझे छूने की इज़ाज़त नहीं मिलती
मैं तो दूर से ही तुझपर, प्यार का अमृत बरसाना चाहता हूँ
ऐ जान तेरी हर ख़्वाइश को, पलकों पर बैठाना चाहता हूँ….

Love Poetry Aks

कितना तड़पता हूँ तेरे लिए, कितना प्यार करता हूँ तुझे
पैगाम ये दुनिया के हर, प्रेमी तक पहुँचाना चाहता हूँ
ऐ जान तेरी हर ख़्वाइश को, पलकों पर बैठाना चाहता हूँ….

जो आग मेरे दिल को, ठंडा सा एहसास कराती है
उसी प्यार की आग को, मैं तुझमें जलाना चाहता हूँ
ऐ जान तेरी हर ख़्वाइश को, पलकों पर बैठाना चाहता हूँ….

बेहोश होकर जी सकूँ, तेरे प्यार के साये में
इन सायों में मरने के ख़ातिर, मैं मौत को जगाना चाहता हूँ
ऐ जान तेरी हर ख़्वाइश को, पलकों पर बैठाना चाहता हूँ….

तेरी ख़ुशी के लिए, हर ज़ख्म सहने को तैयार हूँ
काजल के लिए तेरे मैं, ख़ुद को जलाना चाहता हूँ
ऐ जान तेरी हर ख़्वाइश को, पलकों पर बैठाना चाहता हूँ….

नहीं चाहता किसी की बेसुधी का कारण बन जाओ तुम
सो तेरे कमसिन रूप को, दुनिया से छुपाना चाहता हूँ
ऐ जान तेरी हर ख़्वाइश को, पलकों पर बैठाना चाहता हूँ….

— अक्स

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