Love Shayari

Love Shayari: कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी

Poetry & Shayari

Love Shayari

शायरी: कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी
कवि: अक्स

Love Shayari - Aks

अच्छा हुआ जो प्यार से पहचान हो गयी
कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी

साथ उसके महफ़िल था, हर लम्हा ज़िन्दगी का
कमी से उसके ज़िन्दगी, शमशान हो गयी
कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी….

अरमां किये पूरे, उसने ज़िन्दगी के
आज वो ही एक, अरमान हो गयी
कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी….

वफ़ाएं करके छोड़ दी, उस सितमगर ने
बेवफाई कितनी अब, आसान हो गयी
कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी….

जो कभी ना चाहती थी, मेरी आँखों में आंसू
मेरे दर्द की कहानी, उसकी मुस्कान हो गयी
कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी….

जिस गली में प्यार के, गूंजते थे सुर
वो सुरीली गलियाँ अब सुनसान हो गयी
कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी….

जो मिटाया करती थी, दिल के दर्द को
अनमिटा सा दिल पे वो, निशान हो गयी
कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी….

जिसने बख़्शी ज़िन्दगी अपने प्यार से
आज वो ही मौत का, फरमान हो गयी
कहते थे जिसको जान, वो अंजान हो गयी….

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